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Vijay Jha, Jagran


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सब माया का असर है

Posted On: 20 Mar, 2010  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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…तो क्‍या इसी से हो जाएगा विकास

Posted On: 30 Dec, 2009  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

382 Comments

Hello world!

Posted On: 30 Dec, 2009  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

पिछड़ेपन और उपेक्षा का सवाल छोटे राज्‍यों के आंदोलन का मूल है। इसे सत्‍ता की राजनीति करने वाली पार्टियां कभी समझना नहीं चाहती। वे पिछड़े इलाकों के विकास और सम्‍मान के आंदोलनों को तो पहले कुचलती हैं पिफर उन आंदोलनों के अगुआ को करीने से चुनकर पतित करती है। जनता आंदोलन में होती है मगर सत्‍ता में उसकी भूमिका गौण हो जाती है। छोटे राज्‍य बन भी जायं तो क्‍या बेकार युवाओं, पानी से बीज तक के लिए परेशान किसानों के सवाल हल हो जायेंगे। मेरी समझ से ये सारे सवाल अलग राज्‍य बनने या न बनने के है ही नहीं। सत्‍ता में भागीदारी का सवाल प्रमुख है। संसद और विधानसभाओं में आम जन के सवाल भी चर्चा में आयें देश के गरीबों को लगे कि उनके चुने प्रतिनिधि उनका दर्द समझते हैं तो इस तरह के आंदोलन एक हद तक ठण्‍डे हो जायेंगे। पिछले छह दशकों के अनुभवों ने अग्रेजों से लड़कर हासिल की गयी आजादी के जोश को ठण्‍डा कर दिया। सब मिलकर एक स्‍वतंत्र देश के लिए लड़े थे। अब सब एक दूसरे को अपना हक मारने वाला समझ रहे हैं। सबके अपने मुलुक और देश हैं। सबके अपने नेता। नेता को दिल्‍ली न मिले न सहीं अपने इलाके की ही क्षत्रपी मिल जाय। क्‍या अच्‍छा हो एक राज्‍य ही बन जाये। कोई मंत्री बन जाये कोई प्रमुख संतरी। जनता जाये भाड़ में।

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